कुछ भी हासिल न हुआ दिल को यूँ पत्थर कर के,
जिसे रहना था वो तो फिर भी दरारों में रहा।
आसमाँ को ज़मीं, ज़मीं को आँसमा करुँ,
और बता तेरी ख़ातिर, मैं क्या क्या करुँ
कभी खुद से भी मोहब्बत जताइए जनाब
शानदार इंसान से आपकी मुलाकात होगी
दूर होकर हमारे पास हो तुम,
हमारी सूनी ज़िन्दगी की आस हो तुम,
कौन कहता है हमसे बिछड़ गए हो तुम,
हमारी यादों में हमारे साथ हो तुम।
कुछ फुर्सत के पल उन्हें भी दिया करो
जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी तुम्हे दे दी






