एक बार एक लड़का जिंदगी से परेशान हो कर एक बुजुर्ग के पास जाता है और कहता है मै बहोत परेशान हु। मुझे पैसों की बहोत जरूरत है। मै बहुत परेशान हु, मै चाहता हूं कि बहुत खुश रहूं। बड़े घर में रहु पूरी दुनिया घुमु लेकिन यह सब बगैर पैसे की मुमकिन नहीं है। फिर उस बुजुर्ग ने उस लड़के से कहा की मेरे साथ चलो उस लड़के ने बुजुर्ग के साथ चल दिया । वह बुजुर्ग ने उस लड़के को ऐसे जगह ले गए जहा बहोत सारे कंकड़ पत्थर पड़ा हुआ था।
वह बुजुर्ग ने लड़के से कहा की इन कंकड़ों में एक ऐसी कंकड़ है जो दुनिया के किसी भी चीज को सोने में बदल सकती है। वह कंकड़ जिस भी चीज पर रखो वह सोना हो जाएगा। उस कंकड़ की पहचान यह है कि यहां मौजूद बाकी सभी कंकड़ों से गरम होगा। अगर तुम उस कंकड़ को ढूंढ लिया तो तुम अपनी जिंदगी में जितने चाहो उतने पैसे कमा सकते हो।
वह लड़का बहुत खुश हुआ और सोचा कि यह तो काम बस कुछ हफ्तों का काम है। अगर मै रोज कुछ घंटे उस कंकड़ को ढूंढ़ने में लगाऊं तो बहोत जल्द ही मै उस कंकड़ को ढूंढ लुंगा। लड़का उस कंकड़ को ढूंढ़ने में लग गया। वहां के मौजूद कंकड़ों को हाथ में पकड़कर महसूस करने लगा और उसे जो कंकड़ ठंडी महसूस होती वह उसे समुंदर में फेंक देता । ताकि महसूस कि हुई कंकड़ दोबारा बाकी कंकड़ों में न मिल जाएं।
वह रोज 5 से 6 घंटे कंकड़ को ढूंढ़ने में लगता रहा और देखते ही देखते पांच से छह हफ्ते गुजर गए मगर उस लड़के को वह गरम कंकड़ न मिली। अब बहोत कम कंकड़ रह गई थी और उस लड़के की रफ्तार भी तेज हो गई थी। उसे उम्मीद थी कि वह कंकड़ जरूर मिलेगा। मगर उसको कंकड़ को महसूस करना और नदी में फेंक देने की आदत इतना तेज हो गई थी कि उसके हाथ में जैसे ही कोई कंकड़ आता उसे जल्दबाजी में फेंक देता।
इतनी मेहनत के बाद 6 वे हफ्ते के दूसरे ही दिन उस लड़के को वह गरम कंकड़ मिल गई और जैसे ही उसके हाथ में वह कंकड़ आई वह उसे गरम तो महसूस हुआ लेकिन उसको जल्दीबाजी की आदत हो गई थी। जैसे ही कोई कंकड़ उसके हाथ में आता वह तुरंत उसे दरिया में फेंक देता। तो उस लड़के ने उसे भी दरिया में फेंक दिया। फेंकने की कुछ ही देर बाद उसे अंदाजा हुआ की मै जल्द बाजी में क्या गवा दिया।
उसे बहोत पछतावा होने लगा । मगर अब क्या हो सकता था। उसके 5 से 6 हफ्ते की मेहनत दरिया में जा चुकी थी।
