Best Hindi Motivational Story - ये तीन कहानियां आपकी जिंदगी बदल देगी

Best Hindi Motivational Story

जिंदगी में हम आगे क्यू नही बढ़ते

एक बार का ज़िक्र है एक बादशाह को दो बाज तोहफ़े में मिले, उसने इतने खूबसूरत परिंदे कभी नहीं देखे थे, बादशाह ने दोनो परिंदे अपने मुलाजिम को दिए कि:
          ” वह उनकी तरबियत करे-“
एक दिन मुलाजिम ने बादशाह को बताया कि:
           ” एक परिंदा ऊँची उड़ान उड़ रहा है, और दूसरा जिस दिन से आया है अपनी शाखा से नहीं उड़ पा रहा-“
बादशाह ने मूमालिकत के तमाम  मआलीजो और जादूगरों को तलब कर लिया लेकिन कोई इस बाज को न उड़ा सका-

बादशाह ने अपने मुशीरों के सामने यह मसला रखा-घंटे दिन और दिन महीनों में ढल गए, लेकिन बाज़ न उड़ सका- बादशाह ने किसी ऐसे शख्स को बुलाने का फैसला किया जो कुदरत से गहरी दिलचस्पी रखता हो, बादशाह ने अपने मुशीरो को हुक्म दिया कि:
          ” किसी ऐसे शख्स को ढूंढ कर लाओ जो बरसो जंगलात में गुज़ार चुका हो-“
अगले दिन बादशाह बाज को महल के बागों में उड़ते हुए देख कर हैरान रह गया- बादशाह ने उस शख्स को तलब किया जिसने बाज़ उड़ाया था-उस शख्स को बादशाह के सामने पेश किया गया, बादशाह ने पूछा:
          ” आपने बाज को कैसे उड़ाया?”
वह मुस्कुरा कर बोला:
          ” मैंने वह शाखा काट दी जिस पर बाज बैठा करता था-“

आगे बढ़ने के मवाक़े बहुत हैं लेकिन हम आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करते- हम अपनी आसाइशों से कदम बाहर नहीं निकालते- नई आज़माइश और नए तजुरबे ही जिंदगी में आगे बढ़ने की वजह बनते हैं- आजमाइशों का मुकाबला करें यही कामयाबी का वाहिद रास्ता है..!

2) मौत का डर Best Hindi Motivational Story

कहते हैं कि एक शख्स को मौत से बहुत डर लगता था- दिन रात इसी खौफ में घुलता रहता था कि वो मर जाएगा वो ना ज़िंदगी से लुत्फ उठा सकता था और ना ही सुकून से खा पी सकता था- ना लोगों से हंस बोल सकता था-
उसकी हालत ऐसी बुरी हुई तो उसके यार दोस्त मिलकर सलाह मशवरा करने लगे कि:
              “क्या किया जाए-“
एक ने सलाह दी कि:
             “ये मैन्टल हो चुका है- इसलिए इसे पागलखाने में जमा करा दिया जाए-“
सबने ये राय खारिज कर दी कि:
            “पागलखाने वाले ऐसा पेशेंट पाकर कहीं खुद भी पागल ना हो जाएं-“
दूसरा दोस्त चरसी था जो अपने सारे गम धुंए में उड़ाने का क़ायल था- उसने मशवरा दिया कि:
             “इसे पक्के सोटे पर लगा दिया जाए तो वो भी चरसी की तरह खुश बाश हो जाएगा- जब भी गम सताएगा,एक गहरा कश ही गम को उड़ा देगा-“
सबने इस मशवरे को भी अच्छा ना जाना कि फिर वो हर एक से नशे के लिए पैसे मांगता फिरेगा और थाने में उसकी ज़मानतें भर भर कर सब तंग पड़ जाएंगे-

तीसरे ने मशवरा दिया कि:
            “इसे रूहानियत का रास्ता दिखाया जाए क्यूंकि ये रूहानी मर्ज़ है और इसको रूहानी इलाज ही शिफा देगा-“
इस पर सब मुत्तफिक़ हुए और उसे लेकर एक सूफी साहब के पास पहुंचे-
सूफी साहब ने पूछा कि:
             “बच्चा बता तुझे क्या परेशानी है?”
वो शख्स बोला:
             “सूफी साहब मुझे मौत से बहुत खौफ आता है- सोचता हूं कि अभी खड़े खड़े गिरूंगा और मर जाऊंगा- या बहुत कामयाब ज़िंदगी भी गुज़ार ली तो सब कुछ यहीं पड़ा रह जाएगा और मैं क़ब्र में तन्हा पड़ा हूंगा-“
सूफी:
        “मेरे बच्चे ! एक बात बताओ- अगर तुम किसी से चंद रूपए क़र्ज़ लेते हो, तो क्या वो क़र्ज़ वापस करने से डरते हो?”
शख्स:
        “बिल्कुल भी नहीं..क़र्ज़ तो लिया ही इसलिए जाता है कि वापस किया जाए- लेकिन इस बात का मौत से क्या ताल्लुक़ है?”

सूफी ने ज़मीन से मुठ्ठी भर खाक उठाई और कहने लगा कि:
         “तुम इस खाक से उठे हो और खाक को ये क़र्ज़ एक दिन वापस होना ही है- तुम्हारा हर लुक़्मा,तुम्हारा हर घूंट खाक के इस क़र्ज़ में इज़ाफा कर रहा है- ये खूब जान लो कि जिस मिट्टी पर तुम चलते फिरते हो,तुम उसी से लिया हुआ एक क़र्ज़ हो, और इस मिट्टी पर रखा हुआ तुम्हारा हर क़दम तुम्हे इस बात की याद दिलाता है- ये मिट्टी तुम्हे अपनी तरफ खींचती है- आखिरकार यही मिट्टी तुम्हे निगल जाएगी और तुम्हारी कोई निशानी बाक़ी नहीं रहेगी-“
ये कहकर सूफी साहब ने मुठ्ठी में भरी हुई मिट्टी ऊंची उछाल दी और कहने लगे:


  इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ता है कि तुम ज़िंदगी में कितना ऊंचा उठ जाते हो- इस मुठ्ठी भर मिट्टी ही की मानिंद तुम वापस ज़मीन की तरफ पलटोगे- मौत के इस खौफ से निजात पाना निहायत आसान है- अपनी ज़िंदगी को तोहफा ए खुदावंदी समझो- अपने जिस्म को अपनी मिल्कियत समझना छोड़ दो- बस यही समझो कि ये जिस्म तुम्हे उधार मिला है और तुम्हें ये मालूम नहीं कि कितनी मुद्दत के बाद तुमने इस उधार के जिस्म को लौटाना है- सो उधार वापस करने पर किस चीज़ का खौफ है? खुदा का शुक्र अदा करो कि उसने तुम्हें इतनी खूबसूरत चीज़ इस्तेमाल के लिए दी है और अपनी नेमत तुम पर तमाम की है- सो खौफ मत करो.. खुदा का शुक्र अदा करो-“
वो शख्स इस बारे में जितना सोचता,खुदा का शुक्रगुज़ार होता और इस तरह उसने मौत के खौफ से निजात पा ली…!!!

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3) सबक़ दें और ज़बरदस्ती याद करवाएंं

एक लड़की विंडो के साथ सीट पे बैठी है…गर्मी से तंग और ज़माने भर से बेज़ार…शक्ल इस क़द्र संजीदा कि जैसे कोई रोग लगा हो…
खुदा खुदा करके गाड़ी चलना शुरू हुई..थोड़ी हवा लगना शुरू हुई तो गर्मी का एहसास कम हुआ.. उसने एक नज़र इधर उधर देखा…साथ वाली आंटी को थोड़ा सा धक्का देकर खुद आराम से फैल कर बैठ गई…खिड़की से बाहर देखना और अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचना उसका पसंदीदा मशगला है- अब वो इस मशगले में मसरूफ है-
अचानक उस लड़की के सर पे कोई सख्त सी चीज़ लगी-
उसने चौंक कर देखा ..आगे वाली सीट पे 26 27 सालह लड़के ने अपना बाज़ू इतना लम्बा करके अंगड़ाई ली थी कि उसके हाथ में पकड़ा मोबाइल उसके सर पे लगा था.. लड़की ने नागवारी से उसकी तरफ एक नज़र देखा और दोबारा बाहर की जानिब देखने लगी-

महज़ पांच सात मिनट के बाद मोबाइल उसके चेहरे के सामने लहराया गया… और स्क्रीन पर कोई तस्वीर का सा गुमान हुआ- और तस्वीर देखकर लड़की सीधी होकर बैठ गई- और पलट कर अगली सीट की जानिब देखा..मगर लड़का खुद पीछे मुड़कर नहीं देख रहा था.. सिर्फ मोबाइल वाला हाथ पीछे किया हुआ था..वो भी इस अंदाज़ में कि किसी को शक ना हो-
लड़की एक दम हैरान सी हो गई…इस क़द्र ओछी हरकत… अब वो परेशान सी मुसलसल आगे की तरफ आंखें सिकोड़ सिकोड़ कर देख रही थी…अब लड़के ने अपना नंबर डायल करके एक बार फिर मोबाइल पीछे किया.. ये क्या हो रहा था.. लड़की ने इर्द गिर्द देखा कोई भी मुतावज्जेह नहीं था.. उसने धीरे से हाथ बढ़ा कर मोबाइल को चुटकी से पकड़ा… और खुली खिड़की से बाहर उछाल दिया.. और इंतिहाई बेनियाज़ी से सीट से सर टिका कर आंखें मूंद लीं…

लड़के को यक़ीनन पहले पहल तो समझ नहीं आया होगा कि उसके साथ क्या हुआ….मगर हवास बहाल होते ही उसने शोर मचा दिया कि:
              “पिछली सीट से किसी ने उसका मोबाइल हाथ से छीन लिया है-“
सारी बस मुतावज्जेह….मगर लड़की खामोश तमाशाई….वो शायद लड़की की जुर्रत व बर्दाश्त को आज़मा बैठा था…वो वावेला करे कि:
             “इस “आपकी” का काम है ये….उसको उसी पे शक है-“
मगर बस के लोग हैरान कि आपी को तो सोते से जगाया गया उसको क्या खबर… और एक अंकल लताड़ने लगे कि:
         “आपी के हाथ में अपना साठ सत्तर हज़ार का मोबाइल है वो क्यूं तुम्हारा लेगी…”
और आपी का लहजा इतना हमवार और परेशानी से लबरेज़ कि शक की गुंजाइश ही नहीं-

वो लड़का सारे सफर में परेशान रहा… मोबाइल आसमान निगल चुका था या ज़मीन उसकी समझ से बाहर था- मगर उसको भरपूर यक़ीन था कि मोबाइल उसी लड़की ने ही आगे पीछे किया है…मगर कहां?? उसका चेहरा इतना बड़ा सवालिया निशान था-
वो इस क़द्र परेशान था कि बार बार पीछे मुड़ कर देख रहा था…आंसू आंखों से बाहर निकलना ही चाहते थे..मगर हालात को समझ नहीं पा रहा था- सबक़ अगरचा मुश्किल था..मगर लड़की ने उसको दे दिया था.. और अब उम्मीद थी कि वो इसको सारी उम्र के लिए याद भी रखेगा.. और मोबाइल नंबर खुद पेश करना तो दूर की बात.. किसी के मांगने पे भी दस बार सोच कर देगा-
रोड पे मोबाइल पड़ा नज़र आए तो जान लें कि उसके मालिक के साथ क्या बीती..!!
           सबक़ दे  और ज़बरदस्ती याद करवाएं

नोट: मालिक का पूछ कर शर्मिंदा ना करें..

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