Bulleh Shah Poetry In Hindi - बुल्ले शाह हिन्दी शायरी ।

Bulleh shah – सय्यद अब्दुल्ला शाह क़ादरी (शाहमुखी/गुरुमुखी) जीने बुल्ले शाह के नाम से भी जाना जाता है एक पंजाबी दार्शनिक एवं संत थे। उनके पहले आध्यात्मिक गुरु संत सूफी मुर्शिद शाह इनायत अली थे, वे लाहौर से थे। बुल्ले शाह को मुर्शिद से आध्यामिक ज्ञान रूपी खाजने की प्राप्ति हुई और उन्हें उनकी करिश्माई ताकतों के कारण पहचाना जाता था।

अगर आप भी गूगल पर सर्च कर रहे हैं बुल्ले शाह के हिंदी शायरी और मोटिवेशनल कोट्स तो आज आपके लिए यह पोस्ट लेकर आया हूं जिसमें कई बेहतरीन बुल्ले शाह की मोटिवेशनल कोट्स और शायरी है। इसे पढ़ने के बाद आपको यह पोस्ट कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइएगा और अपने दोस्तों तक शेयर जरूर कीजिएगा

गुस्से विच ना आया कर, ठंडा कर के खाया कर
दिन तेरे भी फिर जाएंगे , ऐसे ना घबराया कर

धीड़ दा बालन लेके तु, दिन डबे घर जाया कर
प्यार दे ऐसे बुटे ला, सारे जग साया कर

अपने अन्दरौ झुड मुका, सच द ढोल बजाया कर
रूखी सूखी खाके तु , सजदे विच जाया कर

मन अंदर तु झाणु दे, अंदर बाहर सफाया कर
ना कर झोली लोगा आगे , रब आगे गुर लाया कर

दिल नू लगे रोन तो की करिए
किसी के याद विच अखिया रोन तो की करिए
सानू दी मिलन दी आस रहती है हर वेड़े बुल्लेया
अगर यार ही भूल जाड़ तो की करिए

पड़ पड़ आलम फाजिल होया
कदी अपने आप नू पढ़ेया नही
जा जा वंतर मंदिर मस्जिदा
कदी अपने अंदर तो वड्या ही नहीं

ऐसे नाजुक दील हैं लोख्या । साडा यार नु दिल न धुखाया कर।।
ना झूठे वादे किथ्था कर ,ना झूठे कस्मे खाया कर,,
तैनू किन्नी बार वाख्या वे । मैनू बार बार ना आजमाया कर।।
तेरी याद विच मै मर जावा । मैंनु इतना याद ना आया कर ।।

हर कोई यार नहीं हो़न्दा बुलेया
कभी अकेले बैठ के सोच सही

हर कोई यार नहीं हो़न्दा बुलेया
कभी अकेले बैठ के सोच सही

जहर देख के पिता ते की किता, इश्क शोच के किता ते की किता
दिल दे के दिल लेण दी आस रखी, वे बुल्ल्या
प्यार वी लालच नाल किता , ते की किता

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