Best Moharram Shayari In Hindi : मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है इस महीने का बहुत सारे विशेषताएं है जैसे की इसी महीने में हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कुबूल हुई , इसी महीने में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने करबला में शहीद हुवे और भी कई सारे विशेषताएं है।
जो इस महीन में घटी है और मोहर्रम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के याद में बनाया जाता है । तो हम आपके लिए करबला की याद में शायरी, इमाम हुसैन की शान में शायरी , Best Moharram Shayari In Hindi | बेहतरीन मोहर्रम की शायरी , करबला का शेर , हुसैन जिंदाबाद शायरी , मोहर्रम का शायरी पोस्ट किए हैं जिसे आपको पूरा जरूर पढ़ना चाहिए।
Best Moharram Shayari In Hindi : इमाम हुसैन की शान पर शायरी
अली से पूछो अदालत किसे कहते है
हुसैन से पूछो सहादत किसे कहते है
वो तो इजाजत नही थी इमाम हुसैन को जंग करने का
वरना अब्बास बता देते कयामत किसे कहते है।

जो इमतेहाने मुहब्बत में डाले जाते हैं
उन्ही के नेजो पे बच्चे उछाले जाते हैं
हुसैनों , कासिमो, अब्बास, असगर
अली के घर में शेर पाले जाते हैं।
हुसैन जिन्दाबाद शायरी.

शाह अस्त हुसैन , बादशाह अस्त हुसैन
दिन अस्त हुसैन , दिन पनाह अस्त हुसैन
सर दाद न दाद दस्त दर दस्त ए यजीद
हक्काक के बिना ला इलाह अस्त हुसैन
सजदे में जा सिर को कटाया हुसैन ने
नेजे पे सर था और जुबान पर आयते
कुरआन इस तरह से सुनाया हुसैन ने
गुरूर टूट गया कोई मर्तबा न मिला
सितम के बाद भी कोई हासिल जफा ना मिला
सर हुसैन का मिला यजीद को लेकीन
सितम यह है की फिर भी झुका हूवा नही मिला
करबला की याद में शायरी,

क्या सिर्फ मुसलमान के प्यारे हैं हुसैन
चर्ख ए नूह ए बशर के तारे है हुसैन
इंसान को बेदार तो हो लेने दो
हर कौम पुकारेगी हमारे है हुसैन।
गलत फहमी है तुम्हारी तुम
हमको मिटा दोगे (2)
हमारे हाथो लाखो से 72 जीत जाते हैं
और कौन 72 थे 72 थे
हजारों में तस्लीम वो रजा वाले
हकीकत में खुदा इनका था और ये थे खुदा वाले
किसी जब वतन पूछा तो हजरत ने कहा
मदीने वाले कहलाते थे हम है कर्बला वाले।
करबला का शेर
हर इप्तेदा से पहले हर इंतेहा के बाद
जाते नबी (सल्लाह अ.) बुलंद हैं जाते खुदा के बाद
दुनिया में एहतराम के काबिल है जीतने लोग
मैं सबको मनाता हूं मगर मुस्तफा ﷺ के बाद
कत्ल ए हुसैन (अलै.) में मरते यजीद है
इस्लाम जिंदा होता हर करबला के बाद।
हम कब कहा हमारी है करबला
हम कब कहा हमारी है करबला
हक की बात करो तो तुम्हारी है करबला
जिसने नबीसा के दिल उतारी है आयते
उसने हमारे दिल उतारी है करबला।
सजदे में सर , गले पर खंजर
और तीन दिन का प्यास
ऐसी नमाज ना होगी फिर
करबला के बाद ।
मोहर्रम की शायरी हिन्दी में
बस चार दिन की थी वह हुकूमत यजीद की
बस चार दिन की थी वह हुकूमत यजीद की
सदिया हुसैन की ज़माना हुसैन का ।
अजब लड़ी है जंग में हुसैन अलै. ने
यजीद से
हो इससे बढ़ कर जीत क्या यजीद था
हुसैन है ।
युही नही जहां में चर्चा हुसैन का
कुछ देख कर हुआ था ज़माना हुसैन का
सर दे के जो दोनो जहा की हुकूमत खरी ली
महंगा पड़ गया यजीद को सौदा हुसैन का।

बहुत करीब से देखा है मैंने सब्र ओ जमील
मगर हुसैन तेरे सब्र का कोई जवाब नही है।
यू तो खुदा से मांगने जन्नत गया था
मगर कर्बला वालो को देख कर नियत बदल गई
कमाल का हौसला था कर्बला वाला का
वहा पर सुकर किए जहा सब्र मुश्किल था।
मुझसे किसी ने कहा वफा का मिसाल दो
मैने कलम उठाया और अब्बास अलैह . लिख दिया
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