एक बार श्री कृष्ण ने भोजन के लिए बैठे थे तभी अचानक अपने मां से बोले मुझे कुछ काम है मै अभी आता हूं बस कुछ ही समय में आता हूं। मां ने बोली अभी तो तुझे भूख को लगी थी आचनक तु कहा जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण ने बोले बस अभी आता हूं , वो तुरंत गए और तुरंत आ भी गए।
मा ने पूछी इतनी जल्दी कैसे आए ............
भगवान श्री कृष्ण ने बोले मेरे एक भक्त को बहुत से लोग पत्थर से मार रहे थे और मार खाते हुए भी कह रहा था। तेरे रहते मुझे क्या फिक्र क्योंकि जो मुझे मार रहे हैं। उनमें भी तू है जिसके सर से खून निकल रहा है उसमे भी तु है। हर जगह तेरा ही रूप है फिर मुझे क्या फिक्र तु जाने तेरा काम जाने
श्री कृष्ण ने मां से आगे कहा - मा मेरे प्रति ऐसा संपर्ण देख कर मुझे रहा नहीं गया । मै खुद को रोक नहीं पाया मुझे उसकी मदद के लिए जाना पड़ा मा ने पूछा फिर तु इतना जल्दी कैसे आ गया । श्री कृष्ण ने बोले मेरे पहुंचने से पहले उसने भी पत्थर उठा लिया था और अब वो लोगो को वापस मार रहा है। जब उसने परिस्थिति अपने हाथ में ले ली है । फिर मेरा वहां क्या काम इसी लिए मै वापस आ गया।
कहानी से सीख : अपने जीवन में सच्चाई के साथ लगातार मेहनत करते हैं और पूरी जिम्मेदारी भगवान पर छोड़ दे की अब तू जान तेरा काम जाने तुझे जो देना होगा दे देना। मै केवल अपने केवल अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करता रहूंगा और यकीन मानो जो व्यक्ति मेहनत करने के बाद ईमानदार रहने के बाद सब कुछ भगवान पर छोड़ देता है उसकी मदद करने तो भगवान खुद आते हैं।
अब कुछ लोग सोचेंगे कि अगली बार कोई मारे तो भगवान का आने का इंतज़ार करेंगे, ना की खुद कोई इक्सन लेंगे । लेकिन कहानी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है। इस कहानी का यह अर्थ है कि - मेहनत करते रहो, सच्चे रहो और बाकी सब भगवान पर छोड़ दो।
